शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

थांरो आवणो स्यात्--

थांरो आवणो स्यात्--

अेक सुवास सी
चेतावती लागै
सुधबुध नै
फड़फड़ा र मुळकया
सनेसा सगळा
हिलोरा लेवै
निंदेळा आळा
 आ आ र उतरवा लागा
केई छिण
मन रे आंगणै
बातां होवै यादां में
देखी अदेखी
सुणी अणसुणी सी
निजरां खिड़कावै
अतीत रा दुवार,
आ रया हो स्यात्
थै म्हारै कनै!!!-किरण राजपुरोहित nitila


बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

हिया रा आळा

हिया रा आळा
यूं कठै खुल सकै है
सोरा इ सोरा
हिया रा आळा
जद चावां
पण ठा नी
 कीकर
दुनियादारी री बातां
उंडै तांई
हिलोर देवे
अर असर दिखण लागै
काम काजां में!
सोचूं क
केई बातां
बिन बतायां इ
कित्ती उंडी उतर जावै
अर आपां ज्याणां
दुनियावी बातां सूं
लुका ले जा रैया हां
खुदनै
.....किरण राजपुरोहित नितिला


बुधवार, 19 जनवरी 2011

.....हिंडोळा , ऐ आळी

.....हिंडोळा , ऐ आळी
चांदणी पकड़ आगळी
चांद री
नर्तन करै
आंगणे
सांवळी चदरिया
लुक गी कठेइ...

ओळा में,
आंख्यां टमकावती
रात बैठी
चुपचाप
बातां करे ज्यां
आपूंआप,
रुनझुण म्हारी पायल
ओरुं चंचल हूंगी ,
झिलमिल
तारां आळी ओढणी
अर उणारी निजरां
रा प्रेम हिंडोळा
आळी ! कियां न झूलू म्हें ?

किरण राजपुरोहित नितिला

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

भाव

कांइ सोच्यो व्हैला भाव
अरथां री आंगळी पकड़ र
भाजता फिरां ला सबद सबद
 भीख मांगता अरथां री
तकता इतहास
सोधालां नूवो अरथावणो!

सोमवार, 13 दिसंबर 2010

. म्हारा भगवान

.    म्हारा भगवान
.    हर छिण इ
.    छू अर नीसरे
.    वै!
.    मनै
.    म्हारे सपनां नै
.    इच्छावां नै
.    म्हारी कामनावां नै
.    अर हवळेस
.    बुचकार र
.    केई पांवडा
.    धकै लेय जावै ,
.    म्हारी तकदीर नै
.    म्हारी कामनावां नै
.    मंजळ कानी
.    आंगळी पकड़ र ,
.    ज्याणे भगवान व्है
.    म्है आकासै जोउं
.    निहाल निजरां सूं
.    पण....
.    छियां निजर आवै
.    म्हारे मातासा री
.    म्हारै  पापासा  री
.    ओह!!!
.    वै तो उणारी आसीसां है!!
.    ......किरण राजपुरोहित नितिला

मंगलवार, 30 नवंबर 2010

पीठी रा गीत

पीठी के गीत बन्ना या बन्नी को पीठी चढाते समय गाये जाते है।  इस गीत में पति अपनी पत्नि से पूछते है कि
आपकी चूनड़ी तेल से कहां भरी ?
आपके हाथ पीले कैसे हुये? तब पत्नि कहती है कि सुंदर से  बन्ना के पीठी उतारते समय हाथ पीले और चूनड़ी तेल से चीगटी हुई है।
पीठी में हल्दी बेसन और जौ के आटे के साथ तेल मिला उबटन होता है।


पीठी  रा   गीत
नरेन्दरसिंघसा पूछै बालमिया!
थांरे चूनड़ चींगट कठै रे होई?
थांरा हाथ जी पीळा कठै रे होया?
रायजादा नै तेल चढावंतड़ा
रुपरोड़ा ने तेल चढावंतड़ा
म्हारी चूनड़ पीळी वठै रे होई
म्हारा हाथ जी पीळा वठै रे होया !

अरविंद सिंहसा पूछै बालमिया!
थांरे चूनड़ चींगट कठै रे होई?
थांरा हाथ जी पीळा कठै रे होया?
रायजादा नै तेल चढावंतड़ा
रुपरोड़ा ने तेल चढावंतड़ा
म्हारी चूनड़ पीळी वठै रे होई
म्हारा हाथ जी पीळा वठै रे होया !

बुधवार, 3 नवंबर 2010

हिवड़े रा भाव




हिवड़े रा भाव
सब्दां रै ढीले बंध में
कियां बाधूं  !
हिवड़े रा भाव मरम ढाळूं तो
 लिपि विखरे
मातरावां सूं नी ताबै
आखरां सूं आपळता
स्वरां नै नीं सांबळै
इण हिये रा भाव !
सूत्र बणा र सांवट ल्यूं
फर्मा में ही टीप द्यूं
रीत रिवाज सूं अळगा
गणित विज्ञान नी है
हिवड़े रा भाव
जो सोचूं
 वै कियां लिखूं
सोचां नै समझ समझावै
 थाम थाम र राखूं पण
म्हासूं धके भाज जावै
गोखां सूं झांक इ ल्यै
हिवड़े रा भाव
..किरण राजपुरोहित नितिला