बनो गीत
लंबा तो केस बनी नै रखड़ी जी सोवे
रखड़ी रा निरखण घर कद आवो ,
ओ केसरिया थांरी मनै ओळूं जी आवै
ओळूं जी आवै बनी नै धान नई भावै,
मैला चढती नै हिचकी जी आवै
ओ केसरिया थांरी मनै ओळूं जी आवै ।।
गोरो सो हिवड़ो बनी नै हार जी सोवे
नेकलेस रा निरखण घर कद आवो
ओ केसरिया थांरी मनै आंळूं जी आवै
ओळूं जी आवै बनी नै धान नई भावै,
मैला चढती नै हिचकी जी आवै ।।
लंबा तो हाथ बनी ने बाजूबंद जी सोवे
गजरां रा निरखण घर कद आवो
ओ केसरिया थांरी मनै ओळूं जी आवै
ओळूं जी आवै बनी नै धान नई भावै,
मैला चढती नै हिचकी जी आवै ।।
गोरा सा पगल्या बनी नै पायल जी सोवे
बिछिया रा निरखण घर कद आवे
ओ केसरिया थांरी मनै ओळूंजी आवै
ओळूं जी आवै बनी नै धान नई भावै,
मैला चढती नै हिचकी जी आवै ।।
गीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गीत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 23 अक्टूबर 2010
गुरुवार, 9 सितंबर 2010
वीरो
वीरो गीत
बैन पूछे-
वीरा ओ कटोड़ा री बाळद सइया उमरीजै
वीरा ओ कटोड़ा में घूरिया रे किसाण?
जामण रो जायो आवियो जी !!
वीरा पडूत्तर देवे-
बाई ऐ बासनीगढ़ सूं बाळद सईंया उमरीजी
बाई ऐ खाराबेरा गढ में घूरिया रे किसाण
जामण रो जायो आवियो जी
वीरा ओ आडा तो फिरे न किरण बाई पूछियो जी
वीरा ओ बाळदड़ी में कांई कांई लाविया जी ?
वीरो-
बाई ऐ आदा में चुड़ा ऐ बाई चूनड़ीजी
आदा में चूड़ा री मजीठ जामण रो जायो आवियो जी
वीरो -
बाई ऐ! मिल म्हारी बेनड़ नैण झकोळ
जामण रा जाया आविया जी
बैन-
नैणा म्हारे काजळया री रेख
नैण झकोळया ना सरे!
वीरो-
बाई ऐ! मिल म्हारी बेनड़ बांस मरोड़
माता रो जायो आवियो जी
बैन-
वीरा ओ !बास्यां म्हारे चुड़लो हस्ती दांत रो
बांस मरोड़या ना सरे!
वीरो-
बाई मिल म्हारी बेनड़ हिवड़ो हिलोळ
जामण रो जायो आवियो जी!
बैन-
बीरा ओ! हिवड़ै म्हारे नवसर हार
हिवड़ेा हिलाळयां ना सरे!
वीरो-
बाई ऐ! मिल म्हारी बेनड़ कड़ियां निवाय
मातासा रो जायो आवियो
बैन-
वीरा ओ कड़ियां म्हारे लाडलपूत
कड़ियां झुकायां ना सरे!
बीरो-
मती करो बाईसा पूतां रो गुमाण
पूत पराया व्हे जासी जी!
मती करो बाईसा धीवां रो गुमाण
धीव साजनिया ले जासी जी !
बाळद - बैलो की पूरी सवारी जो पहले यात्रा का साधन थी ।
बैन पूछे-
वीरा ओ कटोड़ा री बाळद सइया उमरीजै
वीरा ओ कटोड़ा में घूरिया रे किसाण?
जामण रो जायो आवियो जी !!
वीरा पडूत्तर देवे-
बाई ऐ बासनीगढ़ सूं बाळद सईंया उमरीजी
बाई ऐ खाराबेरा गढ में घूरिया रे किसाण
जामण रो जायो आवियो जी
वीरा ओ आडा तो फिरे न किरण बाई पूछियो जी
वीरा ओ बाळदड़ी में कांई कांई लाविया जी ?
वीरो-
बाई ऐ आदा में चुड़ा ऐ बाई चूनड़ीजी
आदा में चूड़ा री मजीठ जामण रो जायो आवियो जी
वीरो -
बाई ऐ! मिल म्हारी बेनड़ नैण झकोळ
जामण रा जाया आविया जी
बैन-
नैणा म्हारे काजळया री रेख
नैण झकोळया ना सरे!
वीरो-
बाई ऐ! मिल म्हारी बेनड़ बांस मरोड़
माता रो जायो आवियो जी
बैन-
वीरा ओ !बास्यां म्हारे चुड़लो हस्ती दांत रो
बांस मरोड़या ना सरे!
वीरो-
बाई मिल म्हारी बेनड़ हिवड़ो हिलोळ
जामण रो जायो आवियो जी!
बैन-
बीरा ओ! हिवड़ै म्हारे नवसर हार
हिवड़ेा हिलाळयां ना सरे!
वीरो-
बाई ऐ! मिल म्हारी बेनड़ कड़ियां निवाय
मातासा रो जायो आवियो
बैन-
वीरा ओ कड़ियां म्हारे लाडलपूत
कड़ियां झुकायां ना सरे!
बीरो-
मती करो बाईसा पूतां रो गुमाण
पूत पराया व्हे जासी जी!
मती करो बाईसा धीवां रो गुमाण
धीव साजनिया ले जासी जी !
बाळद - बैलो की पूरी सवारी जो पहले यात्रा का साधन थी ।
बुधवार, 8 सितंबर 2010
वीरो....
वीरो....
वीरोसा उंची चढी नै नीची उतरुं जी
वीरोसा जोउं म्हारा जामण जाया री बाट जी
ओ जामण रा जाया
वारि ओ फुलड़ा रा भारा
इणने ओसरिये वेगा आवजो
1 वीरोसा चुदड़ी ओढुंला घर री दामां री
वीरोसा कड़ुम्बा में राखूं थारी सोभा ओ
जामण रा जाया
वारि ओ म्हारा उगन्ता सूरज
इणने ओसरिये वेगा आवजो।।
2 वीरोसा चुड़लो पैरुंला घर रै दामां रो
वीरोसा देराणियां जेठाणियां में सोभा जी थांरी
जामण रा जाया
वारि ओ फुलड़ा रा भारा
इणने ओसरिये वेगा आवजो।।
3 वीरोसा मायरो पैरुंला घर रै दामां रो
वीरोसा भरिये हाथां में सोभा थांरी ओ
जामण रा जाया
वारि ओ उगन्ता सूरज
इणने ओसरिये वेगा आवजो।।
वीरोसा उंची चढी नै नीची उतरुं जी
वीरोसा जोउं म्हारा जामण जाया री बाट जी
ओ जामण रा जाया
वारि ओ फुलड़ा रा भारा
इणने ओसरिये वेगा आवजो
1 वीरोसा चुदड़ी ओढुंला घर री दामां री
वीरोसा कड़ुम्बा में राखूं थारी सोभा ओ
जामण रा जाया
वारि ओ म्हारा उगन्ता सूरज
इणने ओसरिये वेगा आवजो।।
2 वीरोसा चुड़लो पैरुंला घर रै दामां रो
वीरोसा देराणियां जेठाणियां में सोभा जी थांरी
जामण रा जाया
वारि ओ फुलड़ा रा भारा
इणने ओसरिये वेगा आवजो।।
3 वीरोसा मायरो पैरुंला घर रै दामां रो
वीरोसा भरिये हाथां में सोभा थांरी ओ
जामण रा जाया
वारि ओ उगन्ता सूरज
इणने ओसरिये वेगा आवजो।।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)


