गुरुवार, 2 मार्च 2017

राजस्थान रा रीत_ रिवाज

विवाह रा रिवाज__ #ढोलटीकणो __ब्याव हुयां पछै आ  रीत है जिणमें कुळ या गांव ढोलीजी नै विदाई दी जावै ।  इण पछै विवाह आयोजन संपूरण हुवै। नवा बीनणी ढोल रै साखियो मांडनै तिलक करै , नेग_मुकलावा  रो बेस चढावै अर  बीनणी  पगै लागै तद ढोलण जी_ढोली जी  सुभराज करै । इण समै बीनणी पैली बार सासरा मांय घूमर करै अर आपरी इण कला सूं खूब जस लेवै। अवांरना_वारणा रै रूपियां  सूं ढोली जी झोळी भरै । अन्न ,धन,वस्त्र री उणनै मनचावी सीख देयीजै।
इणी भांत नाई_खवास जी, फूल मालण जी ,मेहतराणीजी नै इ ब्याव री सीख दिरीजै ।
राजस्थान में ब्याव रै टांणै मांय समाज रै हर अंग री पूरी भूमिका होवै । सगळा एकै दूजां सूं गूंथिजीयोड़ा व्है आ हरख री बात है।


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