शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

राजस्थान में हर मौके रै न्यारा गीतां री तरै ही मायरा री वेला अर दूजा केइ मौकां पर भाई ने अडीकती बैन वीरो नावं रा गीत गाया करै । हर मौका पर भाई या वीरा नै याद करै अर कोई अचरज कोनी क उण बगत बैठी हर बैन रा नैन भीग जावै !!!

वीरो...
कठा सूं आई सूंठ कठा सूं आयो जीरो
कठा सूं आयो ऐ म्हारो जामण जायो वीरो
बंबई सूं आई सूंठ जैपुर सूं आयो जीरो
जोधाणे सूं आयो म्हारो जामण जायो बीरो!

कायण में आई सूंठ कायण में आयो जीरो
कायण में आयो म्हारो जामण जायो वीरो
मोटर में आई सूंठ गाड़ी में आयो जीरो
हवाई जहाज सूं आयो म्हारो जामण जायो वीरो!

कठै सूं उतरै सूंठ कठासूं उतरे जीरो
कठोड़े उतरे म्हारो माता जाया वीरो
पोळां में उतरे सूंठ आंगण में उतरे जीरो
मैलां में उतरे म्हारो माता जाया वीरो!



कठै सोवे सूंठ कठै सोवे जीरो
कठोड़े सोवे म्हारो माता जाया वीरो
लाडू में सोवे सूंठ सब्जी में सोवे जीरो
मायरा में सोवे म्हारो जामण जायो वीरो!
मायरो भरैला म्हारो जामण जायो वीरो!!

3 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया गीत है जी, एक दिन "चिरमी", और मोरु भाई आळो गीत लगाओ, हो सकै तो पॉडकास्ट करो।

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  2. खम्मा घणी
    किरण जी !
    आछो लाग्यो ''' वीरो '' ! नुवो ओरु नुतसो आ उडीक है !
    खम्मा घणी !

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  3. राजस्थानी भाषा में लिखण वास्ते आपरो घणो स्वागत। बहुत चोखी लागी। लिखता रेवो, म्हारा ब्लॉग सानतम सुखाया में भी कुछ राजस्थानी कविता लिखोडी है, मौको मिले तो देखिज्यो।

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