सोमवार, 13 दिसंबर 2010

. म्हारा भगवान

.    म्हारा भगवान
.    हर छिण इ
.    छू अर नीसरे
.    वै!
.    मनै
.    म्हारे सपनां नै
.    इच्छावां नै
.    म्हारी कामनावां नै
.    अर हवळेस
.    बुचकार र
.    केई पांवडा
.    धकै लेय जावै ,
.    म्हारी तकदीर नै
.    म्हारी कामनावां नै
.    मंजळ कानी
.    आंगळी पकड़ र ,
.    ज्याणे भगवान व्है
.    म्है आकासै जोउं
.    निहाल निजरां सूं
.    पण....
.    छियां निजर आवै
.    म्हारे मातासा री
.    म्हारै  पापासा  री
.    ओह!!!
.    वै तो उणारी आसीसां है!!
.    ......किरण राजपुरोहित नितिला

1 टिप्पणी:

  1. मारवाड़ी में अतुकांत कविता का अच्छा प्रयोग किया है आपने
    आभार

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