गुरुवार, 29 जुलाई 2010

........राजस्थानी !!

........राजस्थानी !!
एक एक नै क्यूं बतानी पड़े
क थांरी भासा राजस्थानी !
थे उठो थे जागो अब
थांरो फरज राजस्थानी !
निज घर में निज रै थाने
 क्यूं अणजाणी है राजस्थान?
 मना मना र बात मनवावां
ऐड ी थारै संताना राजस्थानी !
डूंगर  री कांई बात करां
पगां नीचली बळै राजस्थानी !
 पण सदा न यूं रेसी जी
अब समै बदलै है राजस्थानी !
रीढहीनां है वे लिजलिजा प्राणी
जिका थनै कुरावे राजस्थानी !
चोटी सूं अेक वार आइजै नीचै
 ईसो इज समै है राजस्थानी !
वो इज पोछो उठै थरपीजै 
चोखो समै है  आवै राजस्थानी! 
.......किरण राजपुरोहित नितिला

2 टिप्‍पणियां:

  1. एक एक नै क्यूं बतानी पड़े
    क थांरी भासा राजस्थानी !
    थे उठो थे जागो अब
    थांरो फरज राजस्थानी !


    आपणी भाषा आपणो मान
    कायम राखणो चाहिजे
    चोखी बात है

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  2. पण सदा न यूं रेसी जी........ भोत आसा अर उम्मीद री बात करी
    थे किरण जी। घणा मान रै सागै बधाई !

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